संतुलित भोजन और रोज़मर्रा की ऊर्जा
कल्पना करें कि आप काम के एक लंबे दिन के बाद घर लौट रहे हैं। दिल्ली की गर्मी या बेंगलुरु का ट्रैफ़िक आपको थका चुका है। ऐसे में आपके शरीर को सबसे ज़्यादा किस चीज़ की ज़रूरत होती है? एक साधारण, ताज़ा और घर का बना भोजन।
भारत में भोजन हमेशा से परिवार और संस्कृति का केंद्र रहा है। हमारी पारंपरिक थाली, जिसमें रोटी, चावल, दाल, ताज़ी मौसमी सब्ज़ी और दही शामिल है, वह स्वाभाविक रूप से संतुलित होती है। हमें बाज़ार में मिलने वाले पैकेटबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत (highly processed) खाद्य पदार्थों की आवश्यकता नहीं है, जो शरीर को भारीपन देते हैं।
भोजन का समय क्यों महत्वपूर्ण है?
हमारे शरीर की अपनी एक घड़ी (Body clock) होती है। जब हम नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना लगभग एक ही समय पर खाते हैं, तो पाचन तंत्र को अपना काम करने में आसानी होती है। समय की कमी के कारण अक्सर हम ऑफिस में अपना भोजन छोड़ देते हैं, या बहुत देर से खाते हैं, जिससे अगले दिन थकान महसूस होती है।
"संतुलन का अर्थ यह नहीं है कि आप खुद को अपने पसंदीदा भोजन से पूरी तरह वंचित कर लें। इसका अर्थ है, ज़्यादातर दिनों में अपने शरीर को वह देना जो उसे वास्तव में चाहिए—ताज़गी और पोषण।"
चाय का ब्रेक और स्नैक्स
भारत में चाय केवल एक पेय नहीं है, यह काम के बीच लिया जाने वाला एक ज़रूरी विराम है। शाम की चाय के साथ बहुत ज़्यादा मीठे या तले हुए स्नैक्स के बजाय, कभी-कभी भुने हुए चने, मखाना या मुट्ठी भर मेवे आज़माएं। ये चीज़ें आपको रात के खाने तक भारीपन महसूस कराए बिना ऊर्जा देती हैं।